श्यामल मेघ अमृत बरसाया,चुपके से।
शुभ्र सुधाकर जादू ढाया,चुपके से।
तमस यामिनी मुझे सुलाई,सहलाकर।
नवल प्रभाकर मुझे जगाया,चुपके से।
-डॉ.ममता बनर्जी "मंजरी"*✍
शुभ्र सुधाकर जादू ढाया,चुपके से।
तमस यामिनी मुझे सुलाई,सहलाकर।
नवल प्रभाकर मुझे जगाया,चुपके से।
-डॉ.ममता बनर्जी "मंजरी"*✍
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